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'गोवा CEO ने ECI को 8 बार लिखा पत्र', SIR को लेकर कांग्रेस का BJP पर हमला

SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जारी राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस ने गोवा का मामला उठाते हुए BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने सात दिनों में आठ बार चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 97 मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने का अनुरोध किया था।  कांग्रेस का आरोप है कि संबंधित Electoral Registration Officers (EROs) ने इन मतदाताओं को योग्य पाया था, लेकिन ECINet सिस्टम के जरिए नाम बहाल नहीं किए जा सके। चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर अलग-अलग स्तरों पर स्पष्टीकरण सामने आया है, जबकि BJP ने विपक्ष के आरोपों को संवैधानिक संस्था को बदनाम करने का अभियान बताया है।

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'गोवा CEO ने ECI को 8 बार लिखा पत्र', SIR को लेकर कांग्रेस का BJP पर हमला

SIR विवाद में अब गोवा का मामला चर्चा में

नई दिल्ली: Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस ने अब गोवा में मतदाता सूची से जुड़े एक मामले को लेकर BJP पर निशाना साधा है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 24 सितंबर 2026 को एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए The Indian Express की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सात दिनों में आठ बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। इन पत्रों में ऐसे 97 मतदाताओं के नाम शामिल करने का अनुरोध किया गया था, जिन्हें स्थानीय स्तर पर जांच के बाद योग्य पाया गया था। 

97 मतदाताओं के नाम को लेकर क्या है मामला?

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फरवरी को गोवा के CEO ने ECI को आठवीं बार पत्र भेजा था। यह पत्र गोवा की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से कुछ दिन पहले भेजा गया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित EROs ने इन 97 मतदाताओं के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें योग्य पाया था। इसके बाद उनके नाम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जाने की जरूरत बताई गई। 

रिपोर्ट के अनुसार, समस्या यह थी कि स्थानीय EROs ECINet सॉफ्टवेयर में खुद उन नामों को बहाल नहीं कर पा रहे थे, क्योंकि संबंधित अनुमति चुनाव आयोग के IT सिस्टम के नियंत्रण में थी। 

गोवा CEO ने क्या कहा?

Indian Express से बातचीत में गोवा के CEO संजय गोयल ने कहा कि आयोग को उन मामलों के बारे में जानकारी दी गई थी, जिनमें मतदाताओं को “logical discrepancies” के कारण फ्लैग किया गया था।

उनके मुताबिक, नामों को शामिल न करने का निर्णय उच्च स्तर पर लिया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ERO स्तर पर मतदाताओं को दोबारा शामिल करने के लिए ECINet में कोई व्यवस्था होनी चाहिए। 

कांग्रेस ने BJP पर क्या आरोप लगाया?

जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाताओं को सूची से बाहर किया जा रहा है।

गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कावथनकर ने भी BJP और CEC ज्ञानेश कुमार पर SIR के जरिए आगामी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने को गंभीर मामला बताया। 

ये कांग्रेस और विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

BJP ने आरोपों को किया खारिज

विपक्ष के आरोपों को BJP ने खारिज किया है। पार्टी ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने के लिए अभियान चलाने का आरोप लगाया है। 

इस तरह SIR को लेकर विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं—कांग्रेस चुनाव आयोग की प्रक्रिया और ECINet के केंद्रीकृत नियंत्रण पर सवाल उठा रही है, जबकि BJP इन आरोपों को राजनीतिक अभियान बता रही है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट से जुड़ा मामला

गोवा का मामला उस व्यापक विवाद के बीच सामने आया है, जिसमें The Indian Express ने रिपोर्ट किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनावी प्रक्रिया और SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, Form 6 और चुनावी डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे। 

चुनाव आयोग ने इससे अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और सवाल उठना सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले संस्था के आधिकारिक निर्णय होते हैं।

97 नाम अब भी चर्चा का केंद्र

Indian Express की जांच के मुताबिक, 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी जांचे गए 97 नाम 20 सितंबर तक सूची में दिखाई नहीं दिए थे। रिपोर्ट ने इसे ECINet के केंद्रीकृत नियंत्रण और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की भूमिका के बीच तनाव के उदाहरण के तौर पर पेश किया। 

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया सीधे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ी होती है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति का नाम हटाए जाने के कारण और उसके खिलाफ उपलब्ध अपील प्रक्रिया को अलग-अलग मामले के आधार पर देखा जाना जरूरी है।

SIR पर कांग्रेस का आंदोलन भी तेज

गोवा के मामले के साथ कांग्रेस ने SIR को लेकर अपना राजनीतिक अभियान और तेज कर दिया है। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है और देशभर में प्रदर्शन की घोषणा की है।

कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्य निर्वाचन आयोगों के कार्यालयों तक विरोध मार्च और 28 सितंबर को जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट तक मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है। 

इसके अलावा, कांग्रेस विपक्षी दलों से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश भी कर रही है। 

आगे क्या?

SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची के तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं रहा है। ECINet के संचालन, स्थानीय EROs की भूमिका और मतदाता नामों की बहाली जैसे सवाल राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं।

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला आने वाले दिनों में इस बहस का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना रह सकता है। वहीं, चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और अदालतों के सामने चुनौती यह होगी कि मतदाता सूची की शुद्धता के साथ-साथ पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने की प्रक्रिया भी पारदर्शी और कानून के अनुरूप बनी रहे।

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