'कोई अधिकार नहीं', भारत ने UNGA में कश्मीर पर तुर्कीए के राष्ट्रपति एर्दोगन की टिप्पणियों को किया खारिज
तुर्कीए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कश्मीर मुद्दे पर की गई टिप्पणी को भारत ने खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा मामला है और इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: भारत ने तुर्कीए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन की संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने एर्दोगन के संदर्भ को अनावश्यक बताते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़ा विषय है।
एर्दोगन ने UNGA में क्या कहा?
22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने दक्षिण एशिया के विवादों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर समेत सभी विवादों को बातचीत के जरिए और संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा संबंधित प्रस्तावों के दायरे में सुलझाया जाना चाहिए।
एर्दोगन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लगातार जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताते हुए इस मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या हस्तक्षेप को खारिज करता रहा है।
भारत ने दिया कड़ा जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एर्दोगन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत तुर्कीए के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा के संबोधन में भारत और जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश को लेकर किए गए संदर्भों को खारिज करता है।
जायसवाल ने कहा कि यह मामला भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से संबंधित है और इस मुद्दे पर किसी बाहरी पक्ष का कोई locus standi यानी अधिकार क्षेत्र नहीं है।
कश्मीर पर भारत का रुख क्या है?
भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे पर उसका रुख स्पष्ट है और भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। विदेश मंत्रालय पहले भी कश्मीर मुद्दे पर तुर्कीए की टिप्पणियों के जवाब में इसी रुख को दोहरा चुका है।
भारत ने इससे पहले भी तुर्कीए के कश्मीर संबंधी बयानों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। फरवरी 2025 में पाकिस्तान की यात्रा के दौरान भी एर्दोगन ने कश्मीर मुद्दे को बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर हल करने की बात कही थी। उस समय भारत ने उनकी टिप्पणियों को अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से जुड़े आंतरिक मामले पर अनुचित टिप्पणी बताया था।
पहले भी UNGA में उठा चुके हैं कश्मीर का मुद्दा
एर्दोगन इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं। 2025 में उन्होंने कश्मीर के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और बातचीत का उल्लेख किया था। वहीं 2024 में उनके UNGA संबोधन में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख नहीं हुआ था।
इस बार भारत ने फिर स्पष्ट किया है कि कश्मीर पर किसी बाहरी देश की टिप्पणी को वह स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस विषय पर भारत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
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