Infosys के सह-संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन बोले- AI के जरिए मशीनों के इस्तेमाल के तरीके को नए सिरे से बदल सकता है भारत
Infosys के सह-संस्थापक और Axilor Ventures के चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। उनके अनुसार, भारत AI का इस्तेमाल मशीनों और काम करने के तरीकों को नए सिरे से विकसित करने में कर सकता है। उन्होंने भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
लेखक
Jyoti Mukherjee

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह तकनीक देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। Infosys के सह-संस्थापक और Axilor Ventures के चेयरमैन क्रिस गोपालकृष्णन का मानना है कि भारत के पास AI के जरिए मशीनों के इस्तेमाल और काम करने के तरीकों को नए सिरे से विकसित करने का बड़ा अवसर है।
31 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस के एक विशेष इंटरव्यू में क्रिस गोपालकृष्णन ने तकनीक के बदलते दौर, भारत की संभावनाओं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), रिसर्च एंड डेवलपमेंट और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी राय रखी।
AI हर क्षेत्र को प्रभावित करने वाली तकनीक
इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि 1990 के दशक की शुरुआत से लेकर मौजूदा AI युग तक उन्होंने कई तकनीकी बदलाव देखे हैं। क्या इन सभी तकनीकी दौरों के विकास में कोई समानता दिखाई देती है?
इस पर गोपालकृष्णन ने बताया कि कंप्यूटिंग तकनीक के आने से कारोबार की दुनिया में बड़ा बदलाव हुआ था। उस समय लगभग हर व्यावसायिक प्रक्रिया को ऑटोमेट करने की जरूरत थी। भारत ने इस अवसर को पहचाना और कम लागत वाली अर्थव्यवस्था तथा देश में उपलब्ध प्रतिभाशाली लोगों की मदद से दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर सेवाएं विकसित करने का रास्ता अपनाया।
इसी सोच से ग्लोबल डिलीवरी मॉडल का विकास हुआ, जिसने भारतीय IT उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि AI भी एक ऐसी ही व्यापक तकनीक है, जिसका प्रभाव जीवन और कामकाज के लगभग हर क्षेत्र पर पड़ सकता है। हालांकि, मौजूदा समय में दुनिया पहली बार इस तकनीक को समझने और इसके प्रभावों का आकलन करने की चुनौती का सामना कर रही है।
AI से बुद्धिमत्ता और उत्पादकता का लोकतंत्रीकरण
गोपालकृष्णन के अनुसार, AI का शुरुआती प्रभाव बुद्धिमत्ता और उत्पादकता को अधिक लोगों तक पहुंचाने के रूप में दिखाई दे रहा है। इसका अर्थ है कि AI की मदद से अधिक लोग उन तकनीकी क्षमताओं और सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे, जिन तक पहले पहुंच सीमित थी।
भारत के लिए यह अवसर केवल सॉफ्टवेयर सेवाएं विकसित करने तक सीमित नहीं है। देश AI की सहायता से मशीनों के उपयोग, व्यावसायिक प्रक्रियाओं और विभिन्न सेवाओं को नए तरीके से डिजाइन कर सकता है।
भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की बढ़ती संभावनाएं
इंटरव्यू में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा भारत को अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने के लिए चुनने के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। भारत में उपलब्ध तकनीकी प्रतिभा, कुशल पेशेवर और मजबूत IT इकोसिस्टम इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।
ऐसे केंद्र केवल कंपनियों के नियमित कामकाज तक सीमित नहीं रहते, बल्कि तकनीकी विकास, नवाचार और वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक प्रक्रियाओं को संचालित करने में भी योगदान दे सकते हैं।
रिसर्च और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक की भूमिका
गोपालकृष्णन ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश और स्वास्थ्य सेवाओं को नए नजरिए से देखने की जरूरत जैसे विषयों पर भी चर्चा की। तकनीकी क्षेत्र में लंबे समय तक प्रगति बनाए रखने के लिए अनुसंधान और नवाचार को महत्व देना आवश्यक है।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से काम करने के तरीकों और सेवाओं की व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाएं हैं। AI इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
क्रिस गोपालकृष्णन की बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि भारत के सामने AI के दौर में केवल नई तकनीक अपनाने की ही नहीं, बल्कि उसके जरिए काम करने के पुराने तरीकों को बदलने और नए समाधान विकसित करने की भी बड़ी संभावना है।
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