दुर्गा प्रतिमा विसर्जन पर कोलकाता पुलिस आयुक्त का बयान, बोले- कौन छुएगा मूर्ति, यह पुलिस का काम नहीं
कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने कहा है कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान कौन मूर्ति को छुएगा या धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेगा, यह तय करना पुलिस का काम नहीं है। उनका यह बयान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने विसर्जन के दौरान केवल सनातनियों को प्रतिमा छूने देने की बात कही थी। पुलिस आयुक्त के अनुसार, अनुष्ठानों में भागीदारी का फैसला पूजा समितियां करती हैं, जबकि पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
लेखक
Jyoti Mukherjee

कोलकाता में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान मूर्ति को कौन छू सकता है, इस मुद्दे पर पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि विसर्जन में कौन हिस्सा लेगा या कौन प्रतिमा को छुएगा, यह तय करना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
उनका यह बयान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की हालिया टिप्पणी के बाद आया है। मुख्यमंत्री ने विसर्जन के दौरान यह सुनिश्चित करने की बात कही थी कि केवल सनातनी ही दुर्गा प्रतिमा को छुएं।
### पुलिस आयुक्त ने क्या कहा?
शुक्रवार को कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अजय कुमार नंद से मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बारे में सवाल पूछा गया।
इसके जवाब में उन्होंने कहा कि दुर्गा प्रतिमा विसर्जन में कौन शामिल होगा, इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। उनके मुताबिक, पूजा समितियां खुद तय करती हैं कि धार्मिक अनुष्ठानों में कौन भाग लेगा।
पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
### मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की टिप्पणी क्या थी?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान केवल सनातनियों को प्रतिमा छूने देने की बात कही थी। उनकी इस टिप्पणी के बाद धार्मिक अनुष्ठानों में भागीदारी और प्रशासन की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पूजा समितियों के सदस्य और अन्य लोग शामिल होते हैं।
### विसर्जन में पूजा समितियों की भूमिका
पुलिस आयुक्त के बयान के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने वाले लोगों के बारे में निर्णय पूजा समितियां करती हैं। पुलिस की भूमिका सुरक्षा व्यवस्था संभालने, यातायात नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने तक सीमित है।
इस बयान से धार्मिक आयोजन के प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।
### क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
दुर्गा प्रतिमा विसर्जन धार्मिक परंपराओं से जुड़ा आयोजन है, जिसमें अलग-अलग पूजा समितियां अपनी व्यवस्थाओं के अनुसार कार्यक्रम संचालित करती हैं। ऐसे आयोजनों के दौरान प्रशासन के लिए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
पुलिस आयुक्त की टिप्पणी के बाद मुख्यमंत्री के बयान और पूजा समितियों की भूमिका पर चर्चा तेज हो सकती है। फिलहाल, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा विसर्जन में कौन भाग लेगा, इसका निर्णय पुलिस नहीं करती।
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