स्कूल नहीं गईं, फिर भी पति की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं लेहरा बाई
छत्तीसगढ़ की 35 वर्षीय लेहरा बाई ने अपने पति श्रवण सूर्यवंशी तामरे की कथित हिरासत में मौत के मामले में दो साल से अधिक समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के मामले को संभालने के तरीके पर कड़ी टिप्पणी करते हुए सरकार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने, CBI जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के निर्देश दिए।
लेखक
Jyoti Mukherjee

पति की कथित हिरासत में मौत पर लेहरा बाई की लंबी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने दिए अहम निर्देश
छत्तीसगढ़ की 35 वर्षीय लेहरा बाई ने अपने पति की कथित हिरासत में मौत के मामले में न्याय पाने के लिए दो साल से अधिक समय तक संघर्ष किया। स्कूल नहीं जा सकीं लेहरा बाई की कानूनी लड़ाई आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, जहां अदालत ने मामले को संभालने के तरीके पर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की कड़ी आलोचना की।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर जताई नाराजगी
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP), जेल महानिदेशक और गृह विभाग के प्रमुख सचिव के मामले को संभालने के तरीके पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने अधिकारियों की कार्रवाई को ‘अपवित्र’ बताते हुए उनके दावों को स्पष्ट रूप से गलत और निंदनीय करार दिया।
महुआ शराब के मामले में हुई थी गिरफ्तारी
रिपोर्ट के मुताबिक, लेहरा बाई के पति श्रवण सूर्यवंशी तामरे को जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन पर कथित तौर पर 1,200 रुपये मूल्य की छह लीटर महुआ शराब रखने का आरोप था। गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद उनकी मौत हो गई।
25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को लेहरा बाई के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का आदेश भी दिया।
इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
दो बच्चों की मां ने जारी रखी न्याय की लड़ाई
लेहरा बाई दो बच्चों की मां हैं। उन्होंने अपने पति की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए न्यायिक कार्रवाई की मांग जारी रखी। उनकी लड़ाई ने कथित हिरासत में मौत के मामले में जवाबदेही और सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं।
मामले में जवाबदेही पर जोर
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से इस मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई का रास्ता खुला है। CBI जांच के जरिए मौत की परिस्थितियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
नोट: मामला कथित हिरासत में मौत से संबंधित है। आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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