नेपाल में भीषण तबाही क्यों मची, कैसे आ गई अचानक बाढ़? ISRO ने सैटेलाइट तस्वीरों से खोला राज
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के पीछे की वजह अब सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आने लगी है। ISRO के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के शुरुआती आकलन के मुताबिक, ऊंचाई वाले हिमालयी इलाके में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। इससे बर्फ, चट्टान और मलबे का भारी बहाव बना, जिसने नदी तंत्र को अचानक प्रभावित किया और कुछ ही समय में निचले इलाकों में तबाही मचा दी।
लेखक
Vinay Mishra
नई दिल्ली: नेपाल में बुधवार को आई अचानक और बेहद तेज फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। नदियों का पानी देखते ही देखते उफान पर पहुंचा, सड़कें और पुल बह गए और कई इलाके मलबे में तब्दील हो गए। शुरुआत में इस घटना को लेकर अलग-अलग आशंकाएं जताई जा रही थीं, लेकिन अब ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों ने तबाही की संभावित शुरुआत की अहम कड़ी सामने रखी है।
ISRO के National Remote Sensing Centre (NRSC) के प्रारंभिक विश्लेषण के अनुसार, ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का हिस्सा टूटने से यह घटनाक्रम शुरू हुआ हो सकता है। इसके बाद बर्फ और चट्टानों का विशाल मलबा पहाड़ी घाटी में नीचे आया और पानी तथा मलबे के अचानक बढ़े प्रवाह ने फ्लैश फ्लड का रूप ले लिया।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा तबाही का स्रोत
ISRO ने Resourcesat-2A से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण किया है। 26 अगस्त की तस्वीरों में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर के पास बड़े पैमाने पर बदलाव दिखाई दिया। वहीं नीचे की ओर Bhote Koshi नदी में पानी का स्तर बढ़ा हुआ और नदी के आसपास बड़े क्षेत्र में बाढ़ का असर नजर आया।
तस्वीरों की तुलना से यह समझने में मदद मिली कि पहाड़ के जिस हिस्से में पहले बर्फ और चट्टानी क्षेत्र था, वहां बाद की तस्वीर में एक बड़ा बदला हुआ और मलबे से भरा क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
कैसे आई इतनी अचानक बाढ़?
घटनाक्रम को आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है:
ग्लेशियर/बर्फ-चट्टान का टूटना → भारी मलबे का नीचे गिरना → नदी या जलधारा का अस्थायी रूप से बाधित होना → पानी और मलबे का अचानक मुक्त होना → तेज फ्लैश फ्लड।
NRSC के शुरुआती आकलन में भी ice-rock avalanche या landslide के बाद अस्थायी नदी अवरोध और फिर पानी के अचानक निकलने की संभावना बताई गई है। इससे Trishuli नदी तंत्र में तेजी से पानी और मलबे का प्रवाह बढ़ा।
पहले भूकंप का लगा था शक
इस आपदा की शुरुआत में एक भूकंपीय संकेत ने विशेषज्ञों को उलझा दिया था। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में इसे संभावित भूकंप से जोड़कर देखा गया।
लेकिन बाद के विश्लेषण में संकेत मिला कि जो seismic signal दर्ज हुआ था, वह संभवतः ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए मलबे के प्रवाह से पैदा हुआ था। ISRO के आकलन में यह भी संभावना जताई गई है कि करीब 4.9 तीव्रता का भूकंप ग्लेशियर के टूटने को ट्रिगर करने वाले कारकों में से एक रहा हो सकता है।
यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि भूकंप ही बाढ़ की निश्चित वजह था। वैज्ञानिक इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
करीब 4,000 फीट नीचे गिरा ग्लेशियर का हिस्सा
उपलब्ध सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी की ओर गिरा। इतनी ऊंचाई से बर्फ और चट्टान का विशाल द्रव्यमान नीचे आने पर उसकी ऊर्जा बेहद ज्यादा होती है।
इसके साथ पानी, बर्फ, चट्टान और मिट्टी का मलबा नीचे की ओर तेजी से बढ़ा। पहाड़ी नदी की संकरी घाटियों में ऐसा मलबा प्रवाह कुछ ही मिनटों में बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
बारिश नहीं, सिर्फ बारिश से नहीं समझी जा सकती तबाही
फ्लैश फ्लड को केवल सामान्य मानसूनी बारिश का नतीजा मानना इस घटना की पूरी तस्वीर नहीं बताता। शुरुआती वैज्ञानिक आकलन में ग्लेशियर के टूटने और ice-rock avalanche को प्रमुख संभावित कारण माना जा रहा है।
हालांकि, गर्म होती जलवायु और तेजी से पिघलते ग्लेशियर इस तरह की घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों ने बताया है कि हिमालय में बर्फ और पर्माफ्रॉस्ट के कमजोर होने से पहाड़ी ढलानों और ग्लेशियरों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
नदी के बहाव ने बढ़ाई तबाही
ग्लेशियर क्षेत्र से आया मलबा जब नदी तंत्र में पहुंचा तो Bhote Koshi और Trishuli नदी प्रणाली में पानी और मलबे का प्रवाह बेहद तेजी से बढ़ा।
कुछ downstream इलाकों में जलस्तर में असाधारण तेजी से वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, Galchhi क्षेत्र में पानी का स्तर करीब 30 मिनट में लगभग 9 मीटर तक बढ़ा।
यही वजह है कि लोगों को सामान्य बाढ़ की तरह तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिला।
सैटेलाइट तस्वीरों ने क्या-क्या बताया?
ISRO और अन्य सैटेलाइट डेटा से वैज्ञानिकों को तीन अहम चीजें समझने में मदद मिली है:
ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में ग्लेशियर/चट्टानी हिस्से में बड़ा बदलाव।
Bhote Koshi नदी में अचानक बढ़ा बहाव।
नदी के नीचे की ओर बड़े पैमाने पर बाढ़ और मलबे का फैलाव।
यही तस्वीरें आपदा के संभावित शुरुआती बिंदु का पता लगाने में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं।
तबाही कितनी बड़ी है?
नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की खबरें हैं। AP के अनुसार, नेपाल में 157 और तिब्बत में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए गए।
इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं रहा। भारतीय नागरिकों समेत कई विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी प्रभावित क्षेत्र में मौजूद थे। राहत और खोज अभियान जारी है।
भारत के लिए भी क्यों चिंता की बात?
नेपाल से निकलने वाली कई नदियां आगे चलकर भारत में प्रवेश करती हैं। Trishuli नदी आगे Narayani नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है, जबकि भारत में यही नदी प्रणाली Gandak के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसी वजह से नेपाल में अचानक आई बाढ़ का असर भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के नदी क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। दोनों राज्यों में अधिकारियों ने नदी के जलस्तर को लेकर निगरानी बढ़ाई है।
पूरी घटना को ऐसे समझें
चरणक्या हुआ?1ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर/बर्फ-चट्टान का हिस्सा अस्थिर हुआ2बड़ा ice-rock avalanche/भूस्खलन नीचे आया3मलबे ने जलधारा को प्रभावित किया4पानी और मलबा अचानक तेजी से नीचे की ओर बढ़ा5Bhote Koshi/Trishuli नदी तंत्र में तेज उफान आया6निचले इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड आई7सड़कें, पुल, बस्तियां और अन्य ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए
क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?
सीधे तौर पर इस खास घटना का पूरा कारण अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय में बढ़ता तापमान ग्लेशियरों और पहाड़ी इलाकों की स्थिरता पर असर डाल रहा है।
गर्म तापमान ग्लेशियरों के पिघलने, बर्फ के कमजोर होने और कुछ क्षेत्रों में अस्थिर जल तथा बर्फ संरचनाओं के बनने का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में भविष्य में glacial lake outburst floods (GLOFs), ice avalanches और landslide-driven floods का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, इस घटना में जलवायु परिवर्तन की भूमिका कितनी थी, यह निर्धारित करने के लिए अभी विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
निष्कर्ष
नेपाल में अचानक आई इस तबाही के पीछे सिर्फ भारी बारिश की कहानी नहीं है। ISRO के सैटेलाइट विश्लेषण ने हिमालय के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर के टूटने, भारी मलबे के नीचे आने और उसके बाद नदी तंत्र में अचानक उफान की एक संभावित कड़ी सामने रखी है।
सबसे अहम बात यह है कि पहाड़ों में हुई घटना का असर कुछ ही समय में नीचे बसे इलाकों तक पहुंच गया। यही हिमालयी फ्लैश फ्लड को इतना खतरनाक बनाता है। ISRO और अन्य वैज्ञानिक एजेंसियों का विस्तृत विश्लेषण आने के बाद इस आपदा के ट्रिगर और जलवायु की भूमिका की तस्वीर और साफ होगी।
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