पाकिस्तान में अफगान मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, लाहौर हाई कोर्ट ने निष्कासन पर लगाई रोक
पाकिस्तान में पढ़ रहे अफगान मेडिकल छात्रों को लाहौर हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (PMDC) के उन निर्देशों पर रोक लगा दी है, जिनके तहत अफगान मेडिकल और डेंटल छात्रों को संस्थानों से हटाकर अफगानिस्तान लौटने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कोर्ट ने प्रभावित छात्रों को कक्षाओं में लौटने, परीक्षाएं देने और हॉस्टल में वापस जाने की अनुमति दी है। अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
लेखक
Vinay Mishra
लाहौर: पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे अफगान छात्रों के लिए शुक्रवार को राहत की खबर आई। लाहौर हाई कोर्ट ने PMDC के उन आदेशों पर अस्थायी रोक लगा दी, जिनके जरिए पाकिस्तान के मेडिकल और डेंटल संस्थानों में पढ़ रहे अफगान छात्रों को वापस अफगानिस्तान भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
न्यायमूर्ति खालिद इशाक की अदालत ने कहा कि प्रभावित छात्र फिलहाल अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे, परीक्षाओं में बैठ सकेंगे और विश्वविद्यालय के हॉस्टल में वापस जा सकेंगे। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
PMDC के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक
मामला पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल के 31 जुलाई और 1 सितंबर के निर्देशों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने इन आदेशों को गैरकानूनी और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी।
छात्रों का कहना था कि उन्हें अचानक संस्थानों से निकालने और हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए गए, जिससे उनकी वर्षों की पढ़ाई और भविष्य दोनों खतरे में पड़ गए।
छात्रों को फिर से क्लास और परीक्षा की अनुमति
लाहौर हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित अफगान छात्र:
मेडिकल/डेंटल की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
अपनी परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे।
विश्वविद्यालयों की कक्षाओं में लौट सकेंगे।
अपने हॉस्टल में वापस जा सकेंगे।
फिलहाल उनके खिलाफ कोई जबरन निष्कासन कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह राहत उन छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जिनमें कुछ पाकिस्तान में कई वर्षों से मेडिकल शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
13 छात्रों की याचिका से शुरू हुआ मामला
Pajhwok के अनुसार, अदालत के सामने कम से कम 13 अफगान मेडिकल छात्रों की याचिकाएं थीं। इनमें सात महिलाएं और छह पुरुष शामिल हैं। ये छात्र लाहौर के King Edward Medical University, Sheikh Khalifa Bin Zayed Al Nahyan Medical and Dental College और Services Institute of Medical Sciences से जुड़े हैं।
वहीं, अन्य रिपोर्टों में इससे अधिक छात्रों के अदालत का रुख करने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि PMDC के आदेश का असर केवल कुछ चुनिंदा छात्रों तक सीमित नहीं था।
छात्रों ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्हें बिना पर्याप्त सुनवाई का मौका दिए उनकी शिक्षा और रहने की व्यवस्था प्रभावित की गई। छात्रों के वकील ने तर्क दिया कि PMDC ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे जाकर ऐसा निर्देश जारी किया।
छात्रों के लिए मामला सिर्फ पढ़ाई का नहीं है। कई अफगान महिला छात्राओं के लिए पाकिस्तान में मेडिकल शिक्षा जारी रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अफगानिस्तान में महिलाओं की उच्च शिक्षा और मेडिकल प्रशिक्षण पर गंभीर प्रतिबंध हैं। Human Rights Watch ने भी इस फैसले से महिला छात्रों की शिक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी।
PMDC ने राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
अदालत में PMDC की ओर से मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि, अदालत ने इस तर्क के आधार पर छात्रों को तत्काल बाहर करने की कार्रवाई जारी रखने की अनुमति नहीं दी और संबंधित आदेशों को निलंबित कर दिया।
अब स्वास्थ्य मंत्रालय, PMDC और संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को अदालत के सामने अपना जवाब दाखिल करना होगा।
पाकिस्तान सरकार ने कहा- सभी अफगान छात्रों को निकालने का आदेश नहीं
इस मामले में एक महत्वपूर्ण पेच भी सामने आया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा था कि सरकार ने सभी अफगान छात्रों को देश से वापस भेजने का कोई blanket आदेश नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के पास वैध वीजा और मान्य डिग्री कार्यक्रम में दाखिला है, वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए पाकिस्तान में रह सकते हैं। हालांकि, PMDC के निर्देशों से प्रभावित छात्रों की स्थिति पर उन्होंने सवाल सीधे मेडिकल नियामक के पास भेजे।
अचानक क्यों बढ़ा विवाद?
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान ने मेडिकल और डेंटल संस्थानों को अफगान छात्रों के नए दाखिले रोकने तथा मौजूदा छात्रों को वापस भेजने संबंधी निर्देश दिए थे।
इस फैसले से छात्रों के बीच अचानक अनिश्चितता पैदा हो गई। कुछ संस्थानों ने छात्रों को बहुत कम समय में departure formalities पूरी करने को कहा था।
Allama Iqbal Scholarship वाले छात्र भी प्रभावित
मामले में एक अहम पहलू Allama Iqbal Scholarship Programme है। कई अफगान छात्र पाकिस्तान की Higher Education Commission (HEC) से जुड़े इस कार्यक्रम के तहत मेडिकल शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
Dawn के मुताबिक, कुछ याचिकाकर्ता इसी HEC-sponsored scholarship programme के तहत पाकिस्तान पहुंचे थे। छात्रों का कहना है कि दाखिले के समय उन्हें PMDC की अतिरिक्त रजिस्ट्रेशन आवश्यकता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।
अब 18 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
लाहौर हाई कोर्ट ने फिलहाल छात्रों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय, PMDC और संबंधित मेडिकल संस्थानों के कुलपतियों से जवाब मांगा है।
अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को होगी। तब अदालत इस मामले में PMDC के आदेशों की वैधता और छात्रों की स्थिति पर आगे विचार कर सकती है।
छात्रों के लिए फिलहाल बड़ी राहत
लाहौर हाई कोर्ट का आदेश अफगान मेडिकल छात्रों के लिए फिलहाल बड़ी राहत है। उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में छोड़कर तुरंत अफगानिस्तान लौटने की स्थिति से राहत मिली है।
हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं बल्कि अंतरिम राहत है। PMDC और सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत आगे क्या फैसला करती है, इस पर छात्रों का भविष्य निर्भर करेगा।
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