गुलाम जम्मू-कश्मीर में बढ़ रहा विद्रोह, पाकिस्तान में मुनीर की ताकत भी बढ़ी; नेशनल असेंबली ने लगाई मुहर
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में लंबे समय से जारी असंतोष और प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की राजनीति में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका और प्रभाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। जून 2026 से क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में करीब 40 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान में संवैधानिक और राजनीतिक बदलावों के जरिए सैन्य नेतृत्व की शक्ति मजबूत होने की चर्चा तेज है।
लेखक
Vinay Mishra
PoJK में बढ़ता असंतोष और पाकिस्तान में मुनीर की बढ़ती ताकत, क्या बदल रहा है समीकरण?
इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK), जिसे पाकिस्तान आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK) कहता है, में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। क्षेत्र में प्रदर्शन, सड़क जाम और सुरक्षा बलों के साथ टकराव की घटनाओं ने पाकिस्तान सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। इसी बीच पाकिस्तान में सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर का राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
PoJK में जून से जारी है असंतोष
रिपोर्टों के मुताबिक, जून 2026 की शुरुआत से PoJK में विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हुआ है। क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने कई जगह धरने दिए और सड़कों को बंद किया।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, जून से अब तक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में करीब 40 लोगों की मौत हुई है। इलाके में कई स्थानों पर प्रदर्शन और सड़क अवरोध नियमित गतिविधि बन गए हैं।
यह असंतोष अचानक पैदा हुआ संकट नहीं है। PoJK में महंगाई, बिजली और गेहूं की कीमतों सहित आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर पहले भी बड़े आंदोलन हो चुके हैं। 2024 में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद पाकिस्तान सरकार को प्रदर्शनकारियों की कई मांगें स्वीकार करनी पड़ी थीं।
चुनावों के बीच भी तनाव
PoJK में 2026 के चुनाव भी राजनीतिक तनाव के बीच हुए। क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया और प्रतिनिधित्व को लेकर भी विवाद रहा है। खास तौर पर पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को लेकर बहस ने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय स्वायत्तता पर सवाल खड़े किए।
पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां भी PoJK की सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। हालिया चुनावों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने बढ़त का दावा किया है और नवाज शरीफ ने क्षेत्र की नई सरकार से विकास और प्रशासन में बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा जताई है।
उधर पाकिस्तान में असीम मुनीर की ताकत बढ़ी
PoJK में बढ़ते असंतोष के समानांतर पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति में सेना की भूमिका को लेकर भी बहस तेज है।
फील्ड मार्शल असीम मुनीर अब पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) दोनों भूमिकाओं में हैं। हालिया संवैधानिक बदलावों के बाद उनके पद और सैन्य नेतृत्व की शक्ति को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विश्लेषण तेज हुआ है।
एक विश्लेषण के मुताबिक, संवैधानिक बदलावों और सैन्य नेतृत्व की भूमिका ने पाकिस्तान की मौजूदा हाइब्रिड राजनीतिक व्यवस्था में सेना के प्रभाव को और मजबूत किया है।
नेशनल असेंबली में भी मुनीर की भूमिका की तारीफ
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में असीम मुनीर को लेकर सकारात्मक राजनीतिक समर्थन भी देखने को मिला है।
जून में पाकिस्तान की संसद ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की सराहना करते हुए सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस दौरान मुनीर की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया था।
इससे यह संकेत मिला कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल मजबूत है।
PoJK का विरोध और इस्लामाबाद की चुनौती
PoJK में प्रदर्शन केवल राजनीतिक नाराजगी तक सीमित नहीं हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों में महंगाई, बिजली, खाद्य पदार्थों की कीमतें, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
2024 के आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने गेहूं और बिजली की कीमतों में राहत सहित कई मांगें उठाई थीं। सरकार को आंदोलन खत्म कराने के लिए आर्थिक रियायतों का ऐलान करना पड़ा था।
अब 2026 में फिर से असंतोष बढ़ना इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
क्या सेना की बढ़ती ताकत से PoJK का संकट दबेगा?
यह सवाल फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान में सेना का प्रभाव बढ़ने के बावजूद PoJK में स्थानीय असंतोष बना हुआ है।
सैन्य और प्रशासनिक नियंत्रण के जरिए तत्काल कानून-व्यवस्था कायम की जा सकती है, लेकिन लंबे समय में आर्थिक समस्याओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी होगा।
विशेषज्ञों के लिए भी यह देखना अहम होगा कि इस्लामाबाद PoJK के असंतोष से राजनीतिक बातचीत के जरिए निपटता है या सुरक्षा तंत्र पर अधिक निर्भर रहता है।
एक तरफ PoJK में विरोध, दूसरी तरफ मजबूत होता सैन्य नेतृत्व
पाकिस्तान इस समय दो समानांतर चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर PoJK में जनता का असंतोष और राजनीतिक उथल-पुथल है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्तर पर सेना की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है।
असीम मुनीर की बढ़ती संवैधानिक और राजनीतिक भूमिका ने पाकिस्तान की सत्ता संरचना को लेकर बहस को और तेज कर दिया है। वहीं PoJK में जारी विरोध यह सवाल उठा रहा है कि क्या केवल राजनीतिक और सैन्य नियंत्रण से स्थानीय असंतोष को लंबे समय तक शांत रखा जा सकता है?
आने वाले दिनों में PoJK की नई सरकार, पाकिस्तान की संघीय सरकार और सैन्य नेतृत्व इस असंतोष से कैसे निपटते हैं, इस पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।
नोट: PoJK के लिए भारतीय संदर्भ में आम तौर पर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि पाकिस्तान इसे आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK) कहता है। दोनों शब्दों के इस्तेमाल का राजनीतिक संदर्भ अलग है।
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