'जेल जाएंगे ज्ञानेश कुमार', SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद संजय राउत ने बोला हमला
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट सामने आने के बाद शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और कहा कि वह जेल जाएंगे। यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद बढ़ा है जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्ति दर्ज की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय, सुझाव और आंतरिक टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और पिछले एक साल के उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
लेखक
Vinay Mishra
SIR विवाद के बीच संजय राउत का हमला
नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
राउत ने सोशल मीडिया पोस्ट और पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि “ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे”। उन्होंने CEC को हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। ये राउत के राजनीतिक आरोप हैं; इन आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है।
किस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ विवाद?
राउत की प्रतिक्रिया The Indian Express की उस रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से संबंधित कुछ फैसलों पर कथित असहमति का जिक्र किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ कदमों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और SIR की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।
राउत ने क्या कहा?
राउत ने अपने बयान में ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मंत्रिमंडल से हटाने की भी मांग की और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
राउत ने यह भी कहा कि अगर केंद्र सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो वह राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील करेंगे। उनके कुछ बयानों में सेना प्रमुख से हस्तक्षेप की अपील भी शामिल थी। ये सभी राउत के राजनीतिक बयान और मांगें हैं, न कि किसी संवैधानिक या न्यायिक संस्था का निष्कर्ष।
‘ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे’ वाले बयान पर क्यों मचा विवाद?
राउत ने सोशल मीडिया पर ज्ञानेश कुमार को लेकर जेल जाने की बात कही। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने CEC के निलंबन और कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसा कोई न्यायिक आदेश सामने नहीं आया है जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गिरफ्तारी या जेल भेजे जाने का निर्देश दिया गया हो। इसलिए “जेल जाएंगे” को राउत के राजनीतिक दावे के रूप में ही रिपोर्ट किया जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के तौर पर।
चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में निर्णय से पहले अलग-अलग राय, तकनीकी सुझाव, सवाल और आंतरिक टिप्पणियां होना सामान्य है।
ECI ने कहा कि पिछले एक साल में उसके सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग के मुताबिक, करीब 40 नई पहल और चुनावी सुधारों से जुड़े कदम भी आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं।
इस तरह एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों का जिक्र है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि अंतिम निर्णयों में कोई मतभेद नहीं था। दोनों दावों के बीच यही मुख्य अंतर है।
SIR को लेकर असली विवाद क्या है?
Special Intensive Revision के तहत मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया के दौरान मतदाता डेटा, नाम जोड़ने और हटाने तथा प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में चुनाव आयुक्तों ने लिखित तौर पर सवाल या आपत्तियां दर्ज कीं। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसी टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग करके देखना उचित नहीं है, क्योंकि वे संस्थागत विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।
आगे क्या?
SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके भीतर कथित मतभेदों पर राजनीतिक बयानबाजी फिलहाल जारी है। विपक्षी नेताओं ने CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जबकि चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में अंतिम फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।
ऐसे में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संजय राउत की “जेल जाएंगे” वाली टिप्पणी को आरोप/राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। मामले में किसी संभावित कानूनी कार्रवाई या न्यायिक निष्कर्ष की स्थिति अलग से आधिकारिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
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