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होर्मुज पर भी टैरिफ लगाना चाहते हैं ट्रंप, ईरान को चेतावनी- समझौता करो या नरक में जाओ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान को लेकर कड़ा रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि तेहरान के सामने समझौता करने का विकल्प है, जबकि उन्होंने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई की संभावना का भी जिक्र किया। इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने को लेकर ट्रंप की पिछली मांग भी चर्चा में है। हालांकि, जुलाई में ट्रंप ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के माल के मूल्य पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात कही थी, लेकिन अगले ही दिन उन्होंने उस प्रस्ताव को वापस लेते हुए खाड़ी देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौतों की बात कही थी।

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होर्मुज पर भी टैरिफ लगाना चाहते हैं ट्रंप, ईरान को चेतावनी- समझौता करो या नरक में जाओ

होर्मुज और ईरान पर ट्रंप का सख्त रुख

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के साथ संभावित समझौते और आगे की अमेरिकी कार्रवाई को लेकर कड़ा बयान दिया।

ट्रंप ने कहा कि उनके सामने यह विकल्प है कि ईरान के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे देश के पुनर्निर्माण का रास्ता खुले, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने भाषण में पूछा कि क्या ईरान को भविष्य में आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए या उसे पूरी तरह तबाह कर दिया जाए।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य प्रमुख मुद्दों में शामिल है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।

ट्रंप ने जुलाई में कहा था कि अमेरिका होर्मुज का 'गार्जियन' बनकर जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करेगा और इसके बदले जहाजों से शुल्क लिया जाएगा। उस समय उन्होंने माल के मूल्य का 20 प्रतिशत तक शुल्क लेने की बात कही थी।

हालांकि, 14 जुलाई को ट्रंप ने इस प्रस्ताव को वापस लेते हुए कहा कि 20 प्रतिशत 'रीइंबर्समेंट फीस' के बजाय खाड़ी देशों के साथ व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे।

ईरान ने अमेरिकी नियंत्रण को किया खारिज

होर्मुज के प्रशासन या सुरक्षा पर अमेरिकी भूमिका को लेकर ईरान ने पहले ही आपत्ति जताई थी। जुलाई में ईरानी सैन्य कमान ने कहा था कि वह अमेरिका को जलडमरूमध्य के प्रबंधन में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देगा।

मौजूदा संकट में भी होर्मुज से होकर तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। किसी भी लंबे व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान ने बातचीत की संभावना का संकेत दिया

ट्रंप के कड़े बयान के बीच ईरान की ओर से बातचीत की संभावना का संकेत भी मिला है। 22 सितंबर को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज को दोबारा खोल सकता है।

ईरानी अधिकारी के मुताबिक, तेहरान ने 16 सितंबर को मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को अपना प्रस्ताव भेजा था। ईरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू करने का अवसर हो सकती है।

ट्रंप बोले- चुनाव के बाद हो सकता है समझौता

Reuters के मुताबिक, ट्रंप ने 22 सितंबर को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद हो सकता है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते उससे सकारात्मक परिणाम निकलने की संभावना हो।

इससे संकेत मिलता है कि एक ओर अमेरिका ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है, जबकि दूसरी ओर बातचीत की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

तेल बाजार पर भी नजर

होर्मुज संकट का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि अगर समझौता होता है तो तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज से एक अरब बैरल से अधिक तेल की आवाजाही में सुरक्षा प्रदान की है।

आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही और सैन्य गतिविधियां इस संकट की दिशा तय करने वाले प्रमुख मुद्दे रहेंगे।

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