'कानून तोड़ने वाली ताकतें सुरक्षा परिषद में बैठी हैं', UN प्रमुख ने की वैश्विक शक्तियों की आलोचना
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना और वैश्विक शक्तियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक विभाजन के बीच ऐसी शक्तियां भी सुरक्षा परिषद में मौजूद हैं जो खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। उनके मुताबिक, इससे परिषद की प्रभावी कार्रवाई बाधित हुई है। गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार को 'पूर्ण प्राथमिकता' बताते हुए वैश्विक संस्थाओं में शक्ति के पुनर्वितरण की वकालत की। उनका कहना है कि मौजूदा संस्थागत ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की शक्ति-समीकरण को दर्शाता है, जबकि आज दुनिया कहीं अधिक बहुध्रुवीय हो चुकी है।
लेखक
Jyoti Mukherjee
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र से पहले पत्रकारों से बातचीत में गुटेरेस ने कहा कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक विभाजन के बीच कुछ ऐसी शक्तियां भी सुरक्षा परिषद में बैठी हैं, जो खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं।
गुटेरेस के मुताबिक, यही स्थिति सुरक्षा परिषद को प्रभावी ढंग से काम करने में बाधित कर रही है। उन्होंने परिषद में सुधार को तत्काल जरूरी बताते हुए कहा कि वैश्विक संस्थाओं में शक्ति का पुनर्वितरण होना चाहिए।
'कानून का उल्लंघन करने वाली शक्तियां परिषद में'
गुटेरेस से जब पूछा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की लगातार अपील के बावजूद उसका उल्लंघन क्यों जारी है, तो उन्होंने दुनिया में मौजूद भू-राजनीतिक मतभेदों की ओर इशारा किया।
उन्होंने कहा कि इन विभाजनों के बीच ऐसी शक्तियां सुरक्षा परिषद में मौजूद हैं जो खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। उनके अनुसार, इस स्थिति ने सुरक्षा परिषद को पंगु बना दिया है।
गुटेरेस ने किसी एक देश का नाम लेकर इस टिप्पणी को सीमित नहीं किया। उनका बयान व्यापक रूप से मौजूदा वैश्विक शक्ति-संतुलन और सुरक्षा परिषद की संरचना पर केंद्रित था।
सुरक्षा परिषद में सुधार को बताया 'पूर्ण प्राथमिकता'
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार अब टाला नहीं जा सकता। उन्होंने इसे 'absolute priority' यानी पूर्ण प्राथमिकता बताया।
उनके मुताबिक, वर्तमान सुरक्षा परिषद की संरचना दुनिया की मौजूदा वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी शक्ति-संरचना में दुनिया के कई हिस्सों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का आज की तुलना में अलग स्थान था।
गुटेरेस ने कहा कि अगर बहुपक्षीय संस्थाओं को प्रभावी बनाए रखना है, तो उन्हें बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरण के अनुरूप ढालना होगा।
'दुनिया अब ज्यादा बहुध्रुवीय हो रही है'
गुटेरेस ने दुनिया में बहुध्रुवीयता (multipolarity) बढ़ने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक GDP में हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि विकसित देशों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो रही है।
उनके अनुसार, ऐसे बदलावों के बावजूद वैश्विक संस्थाओं में शक्ति का वितरण पुरानी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। इसलिए संस्थागत सुधार और शक्ति के पुनर्वितरण की जरूरत है।
BRICS को लेकर क्या बोले गुटेरेस?
पत्रकारों ने उनसे BRICS और ऐसे अन्य समूहों के बढ़ते प्रभाव के बारे में भी सवाल किया। गुटेरेस ने मौजूदा बहुपक्षीय संस्थाओं और उभरते समूहों के बीच बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन के संदर्भ में जवाब दिया।
उन्होंने संकेत दिया कि BRICS जैसे मंचों का उभार दुनिया के अधिक बहुध्रुवीय होने का हिस्सा है। हालांकि उनका जोर इस बात पर था कि इसका समाधान संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को कमजोर करना नहीं, बल्कि उन्हें मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप सुधारना है।
सुरक्षा परिषद में कौन-कौन से देश हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है। बाकी 10 सदस्य सीमित अवधि के लिए चुने जाते हैं।
वीटो व्यवस्था के कारण किसी भी स्थायी सदस्य की असहमति कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को रोक सकती है। इसी वजह से लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और वीटो व्यवस्था में सुधार की मांग उठती रही है।
सुरक्षा परिषद पर लंबे समय से उठते रहे हैं सवाल
सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार की मांग नई नहीं है। कई देश और क्षेत्रीय समूह लंबे समय से तर्क देते रहे हैं कि परिषद की मौजूदा संरचना आज की वैश्विक राजनीति और आर्थिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती।
भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील जैसे देश सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग करते रहे हैं। अफ्रीकी देशों की स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुधार के समर्थकों का कहना है कि परिषद में अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व उसकी वैधता और प्रभावशीलता बढ़ा सकता है। दूसरी ओर, सदस्य देशों के बीच इस बात पर मतभेद हैं कि विस्तार का स्वरूप क्या हो और वीटो अधिकार में किस तरह बदलाव किया जाए।
गुटेरेस के कार्यकाल का अंतिम दौर
गुटेरेस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वह अपने मौजूदा दूसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के अंतिम दौर में हैं। दिसंबर 2026 में उनका कार्यकाल समाप्त होना है।
22 सितंबर से संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस शुरू होने वाली है। इस दौरान दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और सरकारों के प्रमुख न्यूयॉर्क में जुटेंगे।
गुटेरेस ने अपने कार्यकाल के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया लगातार बहुध्रुवीय होती जा रही हो, तब शांति, विकास और मानवाधिकारों को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जरूरी है।
वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की बहस तेज
गुटेरेस की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूक्रेन, पश्चिम एशिया और अन्य संघर्षों के बीच संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता और सुरक्षा परिषद की भूमिका पर लगातार बहस हो रही है। आलोचक लंबे समय से वीटो व्यवस्था और स्थायी सदस्यों के बीच मतभेदों को परिषद की कार्रवाई में बाधा के रूप में देखते रहे हैं।
गुटेरेस का ताजा बयान इसी व्यापक बहस को आगे बढ़ाता है। उनका जोर सुरक्षा परिषद और अन्य वैश्विक संस्थाओं को मौजूदा शक्ति-संतुलन के अनुरूप बदलने पर है, ताकि बहुपक्षीय व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े संकटों पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सके।
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