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'मुकाबला करें, कुश्ती नहीं...', अमेरिका के किस डर को खत्म करने के लिए शी चिनफिंग ने दिया ऐसा संदेश?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में वॉशिंगटन पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन यह ऐसी “कुश्ती” नहीं होनी चाहिए जिसमें एक की जीत और दूसरे की हार हो। शी ने दोनों देशों को थ्यूसिडाइड्स ट्रैप से बचने और सैन्य संवाद बनाए रखने की बात कही। उनका संदेश ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, ताइवान और रणनीतिक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा जारी है।

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'मुकाबला करें, कुश्ती नहीं...', अमेरिका के किस डर को खत्म करने के लिए शी चिनफिंग ने दिया ऐसा संदेश?

नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वॉशिंगटन में ऐसा संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच मुकाबले को टकराव में बदलने से रोकने पर जोर दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान शी ने कहा कि अमेरिका और चीन को प्रतिस्पर्धा से बचने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा “स्वस्थ” और एक निश्चित सीमा के भीतर होनी चाहिए। उन्होंने इसे ऐसी दौड़ बताया जिसमें दोनों एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश करें, न कि ऐसी कुश्ती जिसमें केवल एक पक्ष जीत सकता हो।

'मुकाबला करें, कुश्ती नहीं' से क्या कहना चाहते थे शी?

शी का संदेश मूल रूप से यह था कि अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा हो सकती है, लेकिन दोनों देशों को ऐसी स्थिति से बचना चाहिए जहां प्रतिस्पर्धा सीधे टकराव में बदल जाए।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हित गहराई से जुड़े हुए हैं और सहयोग से दोनों को फायदा हो सकता है, जबकि टकराव दोनों के लिए नुकसानदेह होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों को शांति से साथ रहने का रास्ता तलाशना चाहिए।

शी ने विशेष रूप से दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद जारी रखने और संकट की स्थिति में बातचीत तथा तनाव कम करने की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की जरूरत बताई।

अमेरिका को किस 'डर' की बात समझा रहे हैं शी?

शी के बयान में जिस अवधारणा का उल्लेख हुआ, वह है 'थ्यूसिडाइड्स ट्रैप'।

यह अवधारणा उस स्थिति को समझाने के लिए इस्तेमाल की जाती है जिसमें एक तेजी से उभरती शक्ति किसी मौजूदा प्रमुख शक्ति के सामने चुनौती बनती है और दोनों के बीच तनाव बढ़ने से सैन्य संघर्ष का खतरा पैदा हो सकता है।

शी ने कहा कि चीन और अमेरिका को इस जाल से बचना चाहिए। उनका संदेश था कि चीन के उभरने और अमेरिका की मौजूदा वैश्विक स्थिति के बीच प्रतिस्पर्धा को अनिवार्य रूप से युद्ध या टकराव की दिशा में नहीं जाना चाहिए।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि थ्यूसिडाइड्स ट्रैप कोई यह भविष्यवाणी नहीं है कि अमेरिका और चीन के बीच युद्ध होना ही है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में इस्तेमाल होने वाला एक विश्लेषणात्मक ढांचा है, जिसके जरिए ऐसी शक्ति-प्रतिस्पर्धा के जोखिम को समझाया जाता है।

चीन और अमेरिका के बीच तनाव किन मुद्दों पर है?

अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा कई क्षेत्रों में फैली हुई है।

तकनीक: दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी AI और सुपरइंटेलिजेंस को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से जोड़ा था।

दुर्लभ खनिज: रेयर अर्थ मिनरल्स और उनसे जुड़े सप्लाई चेन भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दा हैं। ये संसाधन इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग सहित कई आधुनिक तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

ताइवान: ताइवान अमेरिका-चीन रणनीतिक संबंधों का सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान को रक्षात्मक समर्थन देता रहा है। दोनों देशों के नेताओं की बातचीत में यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

व्यापार: अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ और व्यापार नीति को लेकर भी लंबे समय से विवाद रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक निर्भरता के बावजूद व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

क्या शी ने अमेरिका को युद्ध से बचने की चेतावनी दी?

शी ने अपने सार्वजनिक संबोधन में सीधे तौर पर अमेरिका को युद्ध की धमकी नहीं दी। इसके बजाय उन्होंने टकराव से बचने और संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं को नियमित संवाद जारी रखना चाहिए और संकट के समय संचार तथा उसे रोकने के तरीकों को बेहतर बनाया जाना चाहिए।

इसका एक व्यावहारिक पहलू यह है कि जब दो बड़ी सैन्य शक्तियों के बीच तनाव बढ़ता है, तो सैन्य-से-सैन्य संचार गलतफहमी या किसी आकस्मिक घटना के बढ़ने के जोखिम को कम करने का एक माध्यम हो सकता है।

ट्रंप का रुख क्या रहा?

शी के मुकाबले ट्रंप ने अपने शुरुआती सार्वजनिक वक्तव्य में दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों और अमेरिका-चीन सहयोग पर ज्यादा जोर दिया।

ट्रंप ने कहा कि 2016 में उनके पहले राष्ट्रपति चुनाव के बाद से शी के साथ उनकी दोस्ती बनी है और यह आपसी सम्मान तथा दोनों देशों के हितों पर आधारित है। उन्होंने दोनों देशों के बेहतर भविष्य के लिए साथ काम करने की बात कही।

हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा समाप्त नहीं हुई है। तकनीक, व्यापार, ताइवान और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित अभी भी कई जगह अलग हैं।

क्या चीन अमेरिका से मुकाबला नहीं करना चाहता?

शी के बयान को अमेरिका के साथ प्रतिस्पर्धा खत्म करने की घोषणा के रूप में देखना सही नहीं होगा।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करने से बचने की जरूरत नहीं है। उनका जोर इस बात पर था कि प्रतिस्पर्धा “स्वस्थ” रहे और उसकी सीमाएं तय हों।

यानी बीजिंग की सार्वजनिक स्थिति में प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों के लिए जगह है। आर्थिक और तकनीकी क्षेत्र में मुकाबला जारी रह सकता है, जबकि दोनों पक्ष रणनीतिक गलतफहमी और सैन्य टकराव से बचने की कोशिश कर सकते हैं।

AI पर भी शी का बड़ा संदेश

शी ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों की जिम्मेदारी है कि AI का विकास और प्रबंधन इस तरह हो कि वह मानव नियंत्रण में रहे और लोगों के कल्याण के लिए इस्तेमाल हो।

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI अब अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा का एक प्रमुख क्षेत्र बन चुका है। दोनों देश अत्याधुनिक AI मॉडल, कंप्यूटिंग क्षमता और संबंधित तकनीकी ढांचे में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या यह अमेरिका-चीन संबंधों में नया मोड़ है?

शी की वॉशिंगटन यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के संबंधों में प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं।

Lowy Institute के विश्लेषण के मुताबिक, शी के “healthy competition” और “not a wrestle” वाले बयान का एक अर्थ यह है कि चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को ऐसे ढांचे में सीमित रखना चाहता है जिसमें दोनों पक्ष आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में मुकाबला कर सकें। हालांकि, विश्लेषण यह भी रेखांकित करता है कि ताइवान और एशिया-प्रशांत में शक्ति-संतुलन जैसे मुद्दे अधिक कठिन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े हैं।

इसलिए केवल एक भाषण के आधार पर अमेरिका-चीन संबंधों में स्थायी बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

आगे क्या देखना होगा?

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश व्यापार, AI, रेयर अर्थ मिनरल्स और ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ते हैं।

शी ने टकराव से बचने के लिए सैन्य संवाद और संकट प्रबंधन पर जोर दिया है। वहीं दोनों देशों की तकनीकी और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी जारी है।

ऐसे में “मुकाबला करें, कुश्ती नहीं” का संदेश फिलहाल अमेरिका-चीन संबंधों के लिए एक ऐसा सार्वजनिक सूत्र है जिसमें प्रतिस्पर्धा को स्वीकार करते हुए उसे सीधे टकराव में बदलने से रोकने पर जोर दिया गया है।

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