‘यह 1945 का समय नहीं है’, UNSC सुधार पर UNGA अध्यक्ष खलीलुर रहमान बोले- दुनिया आगे बढ़ चुकी है
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सार्थक सुधार की जोरदार वकालत की है। पद संभालने के बाद उन्होंने कहा कि दुनिया 1945 में नहीं है और संयुक्त राष्ट्र की संरचना को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि सुधार महज दिखावटी नहीं, बल्कि ऐसे होने चाहिए जो वैश्विक संस्था में जनता का भरोसा फिर से कायम कर सकें।
लेखक
Vinay Mishra
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की कमान संभालने के तुरंत बाद अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने लंबे समय से लंबित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “यह 1945 नहीं है” और आज की दुनिया को उसी दौर की व्यवस्था से नहीं चलाया जा सकता।
रहमान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए संस्थागत बदलाव जरूरी हैं। उनके मुताबिक, सुधार केवल औपचारिक या मामूली बदलाव तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि ऐसे होने चाहिए जिनसे दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के प्रति भरोसा मजबूत हो।
‘यह 1945 नहीं, 21वीं सदी है’
UNGA अध्यक्ष ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों से गुजर रही थी। आज अंतरराष्ट्रीय शक्ति-संतुलन, अर्थव्यवस्था, तकनीक और वैश्विक चुनौतियां काफी बदल चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “यह 1945 नहीं है... हम San Francisco नहीं कर रहे हैं।” उनका इशारा 1945 के उस सम्मेलन की ओर था, जहां संयुक्त राष्ट्र चार्टर को अंतिम रूप दिया गया था। रहमान ने कहा कि अब 21वीं सदी है, दुनिया आगे बढ़ चुकी है और संगठन को भी आगे बढ़ना होगा।
UNSC में सुधार को लेकर क्या बोले रहमान?
रहमान ने कहा कि वह सुरक्षा परिषद सुधार की प्रक्रिया को “बहुत, बहुत गंभीरता” से आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने Inter-Governmental Negotiations (IGN) प्रक्रिया के लिए facilitators नियुक्त करने की बात भी कही है।
उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के सामने इस समय भरोसे की कमी एक बड़ी समस्या है। इसलिए सुधार ऐसे होने चाहिए जो संगठन को सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी प्रभावी और प्रासंगिक बनाएं।
सिर्फ दिखावे के सुधार से नहीं बनेगी बात
रहमान ने कहा कि अगर सुधार केवल मामूली या प्रतीकात्मक बदलाव तक सीमित रहे तो वे जनता का भरोसा वापस नहीं ला पाएंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “reforms must be meaningful” यानी सुधार वास्तविक और प्रभावी होने चाहिए। उनका मानना है कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसा मंच बनना चाहिए जहां देश उसके फैसलों और भूमिका पर भरोसा कर सकें।
UN Security Council में बदलाव की मांग क्यों?
UNSC की मौजूदा संरचना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था को दर्शाती है। परिषद में पांच स्थायी सदस्य—अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस—वीटो अधिकार रखते हैं, जबकि अन्य सदस्य अस्थायी आधार पर चुने जाते हैं।
भारत समेत कई देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की मांग कर रहे हैं। खास तौर पर Global South का तर्क है कि आज की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बदलाव के बावजूद निर्णय लेने वाली सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में प्रतिनिधित्व पुरानी शक्ति-संरचना के मुताबिक बना हुआ है।
‘मैं सभी देशों का अध्यक्ष हूं’
रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि महासभा अध्यक्ष के रूप में वह केवल अपने देश बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान भी उन्होंने वादा किया था कि चुने जाने के बाद वह हर देश के अध्यक्ष होंगे, चाहे उस देश ने उनके पक्ष में मतदान किया हो या नहीं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सदस्य देशों के जनादेश के अनुरूप काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
संवाद और सहयोग पर रहेगा जोर
रहमान ने कहा कि वह अपनी अध्यक्षता के दौरान संवाद, सहयोग और साझा आधार खोजने पर विशेष जोर देंगे। उन्होंने माना कि संयुक्त राष्ट्र के सामने मौजूद हर विवाद का समाधान तुरंत या आसानी से नहीं हो सकता।
लेकिन उनके अनुसार, मतभेदों के बावजूद देशों को साझा जमीन तलाशने की कोशिश जारी रखनी चाहिए।
AI और नई तकनीक भी एजेंडे में
UNGA अध्यक्ष ने सुरक्षा परिषद सुधार के अलावा Artificial Intelligence और नई तकनीकों के वैश्विक शासन को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
उनका कहना है कि तकनीकी बदलाव से नए अवसर पैदा हो रहे हैं, लेकिन इसके साथ शासन और जवाबदेही की नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र को इन बदलावों पर वैश्विक सहयोग का मंच बनना चाहिए।
भारत के लिए भी अहम संदेश
UNSC सुधार का मुद्दा भारत के लिए खास महत्व रखता है। नई दिल्ली लंबे समय से सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के विस्तार और भारत को स्थायी सदस्य बनाने की मांग करती रही है।
ऐसे में रहमान का यह बयान कि 1945 की व्यवस्था को 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की जरूरत है, भारत सहित उन देशों की दलील को बल देता है जो UNSC में अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, रहमान ने अपने ताजा बयान में किसी एक देश की स्थायी सदस्यता का समर्थन करने के बजाय व्यापक और सार्थक संस्थागत सुधार पर जोर दिया है।
अब आगे क्या होगा?
रहमान के कार्यकाल में UNSC सुधार को लेकर Inter-Governmental Negotiations प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन सुरक्षा परिषद की संरचना बदलना आसान नहीं है। इसके लिए व्यापक सदस्य-समर्थन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में बदलाव की प्रक्रिया की जरूरत होती है।
इसलिए रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सुधार की जरूरत पर सहमति बनाना नहीं, बल्कि सदस्य देशों को ठोस बदलाव के लिए एक साझा रास्ते पर लाना होगी।
एक बात हालांकि साफ है—UNGA के नए अध्यक्ष ने शुरुआत में ही संकेत दे दिया है कि उनके लिए संयुक्त राष्ट्र सुधार केवल भाषण का मुद्दा नहीं, बल्कि कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक होगा।
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