तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा में तैनात रहेंगे दो पुलिसकर्मी, हाई कोर्ट का बंगाल सरकार को निर्देश
कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को सुरक्षा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जब भी वह अपने कृष्णनगर लोकसभा क्षेत्र में जाएंगी, उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। यह अंतरिम सुरक्षा व्यवस्था 30 दिनों तक लागू रहेगी। अदालत ने अंडे और अन्य वस्तुएं फेंकने जैसी घटनाओं पर बंगाल सरकार को सख्त कार्रवाई करने को भी कहा है।
लेखक
Vinay Mishra
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अहम निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि जब भी मोइत्रा अपने कृष्णनगर लोकसभा क्षेत्र में जाएंगी, उनकी सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं। यह सुरक्षा व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए लागू रहेगी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह आदेश मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान कथित तौर पर हो रहे विरोध, अंडे-पत्थर समेत अन्य चीजें फेंके जाने और परेशान किए जाने की शिकायत की थी।
48 घंटे पहले देनी होगी जानकारी
हाई कोर्ट ने कहा कि मोइत्रा को अपने कृष्णनगर क्षेत्र के दौरे से कम से कम 48 घंटे पहले कृष्णनगर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक को ईमेल के जरिए सूचना देनी होगी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक उनके दौरे के दौरान दो पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करेंगे। यह व्यवस्था फिलहाल 30 दिनों के लिए है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी, जब पुलिस अधीक्षक को अदालत में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
अंडे-पत्थर फेंके जाने का आरोप
मोइत्रा की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान विरोध प्रदर्शन और कथित तौर पर अंडे, टमाटर, आलू और पत्थर फेंकने जैसी घटनाएं हुई हैं।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि ऐसी परिस्थितियों के कारण सांसद के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से जाना और अपने संसदीय दायित्वों का निर्वहन करना मुश्किल हो रहा है।
हाल के एक मामले में मोइत्रा के काफिले के सामने विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की घटना भी सामने आई थी। इस दौरान उनके वाहन को रोकने की कोशिश और गाड़ी के बोनट पर हाथ मारने के आरोप लगे थे।
हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने सार्वजनिक रूप से अंडे फेंकने और इस तरह के उत्पीड़न की घटनाओं को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि इस तरह की घटनाओं से सख्ती से निपटा जाए, वरना स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी निर्वाचित सांसद को इस तरह की घटनाओं का सामना करना पड़ता है, तो फिर अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े अन्य राजनीतिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा का क्या होगा।
राजनीतिक विरोध की मर्यादा पर कोर्ट की चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सिर्फ मोइत्रा की व्यक्तिगत सुरक्षा का सवाल नहीं था। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राजनीतिक विरोध किस हद तक स्वीकार्य हो सकता है।
अदालत के निर्देश का व्यापक संदेश यही है कि राजनीतिक मतभेद या विरोध प्रदर्शन किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की सुरक्षा और उसके संवैधानिक दायित्वों में बाधा नहीं बनना चाहिए।
30 दिन के लिए अंतरिम सुरक्षा
फिलहाल कोर्ट ने स्थायी सुरक्षा कवर का आदेश नहीं दिया है। दो पुलिसकर्मियों की तैनाती अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 30 दिनों के लिए की गई है।
1 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की स्थिति पर विचार कर सकती है।
कृष्णनगर में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
महुआ मोइत्रा कृष्णनगर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस की सांसद हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक गतिविधियों और विरोध प्रदर्शनों के बीच उनके निर्वाचन क्षेत्र में भी राजनीतिक तनाव की घटनाएं सामने आई हैं।
ऐसे माहौल में हाई कोर्ट का सुरक्षा निर्देश राज्य में राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
अदालत के आदेश के मुताबिक, मोइत्रा को अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे की जानकारी 48 घंटे पहले पुलिस अधीक्षक को देनी होगी। इसके बाद दो पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।
वहीं, 1 अक्टूबर को पुलिस को यह बताना होगा कि अदालत के निर्देश को किस तरह लागू किया गया और क्षेत्र में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश महुआ मोइत्रा को अपने निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक और संसदीय गतिविधियां जारी रखने के लिए अंतरिम सुरक्षा देता है। साथ ही अदालत ने बंगाल सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि राजनीतिक विरोध के नाम पर किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अंडे, पत्थर या अन्य वस्तुएं फेंकने जैसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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