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सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा, सर्किट हाउस से निकालने का आरोप; CJI बोले- हाई कोर्ट भी सुन सकता है मामला

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने नदिया के कृष्णानगर सर्किट हाउस से कथित तौर पर देर रात बाहर निकाले जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनके वकील ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई हाई कोर्ट के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद की। सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई, लेकिन CJI सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने से परहेज किया और कहा कि हाई कोर्ट भी इस मामले को सुन सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महुआ मोइत्रा, सर्किट हाउस से निकालने का आरोप; CJI बोले- हाई कोर्ट भी सुन सकता है मामला

तृणमूल कांग्रेस की कृष्णानगर सांसद महुआ मोइत्रा एक बार फिर कानूनी लड़ाई के केंद्र में हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के सर्किट हाउस से कथित तौर पर देर रात बेदखल किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मोइत्रा का आरोप है कि जिला प्रशासन ने उन्हें उस कमरे को खाली करने के लिए कहा, जो उनके मुताबिक उनके निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान उनका नियमित आवास था।

मामला 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। मोइत्रा के वकील ने CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने Article 32 के तहत दायर याचिका का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई के लिए हामी नहीं भरी।

14 अगस्त की रात क्या हुआ था?

महुआ मोइत्रा के मुताबिक, वह 14 अगस्त की शाम करीब 6.30 बजे कृष्णानगर सर्किट हाउस पहुंची थीं और उन्हें उनका नियमित कमरा आवंटित किया गया था। उन्होंने बताया कि रात करीब 9.20 बजे उन्हें कमरे में खाना दिया गया।

इसके कुछ ही देर बाद, रात 9.47 बजे उन्हें फोन कर कमरा खाली करने के लिए कहा गया। बाद में उन्हें एक प्रशासनिक आदेश की कॉपी भेजी गई। मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि सर्किट हाउस के बाहर भीड़ जमा थी और 'जय श्री राम' के नारे लगाए जा रहे थे।

मोइत्रा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें रात में अचानक बाहर जाने के लिए कहा, जबकि वह पहले से कमरे में ठहरी हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?

मोइत्रा की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मामला केवल एक सांसद के आवास का नहीं है, बल्कि इसमें संघवाद और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल हैं।

वकील ने दावा किया कि स्थानीय अधिकारियों ने रात करीब 11 बजे सांसद को सर्किट हाउस से निकाल दिया और यह कार्रवाई उस समय हुई जब कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही उन्हें संरक्षण देने वाला आदेश पारित कर चुका था। याचिका में पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई।

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के लिए तत्काल लिस्टिंग की मांग की गई थी। हालांकि, CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ शुरुआत में मामले को सुनने को लेकर इच्छुक नहीं दिखी।

LiveLaw के मुताबिक, CJI ने कहा कि अदालत इस स्तर पर मामले को entertain नहीं करने जा रही है। बाद में उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट भी इस मामले को सुन सकता है।

इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले के आरोपों या प्रशासन की कार्रवाई की वैधता पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।

महुआ मोइत्रा ने लोकसभा स्पीकर से भी की थी शिकायत

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले महुआ मोइत्रा ने इस मामले को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने भी उठाया था।

उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार को लेकर शिकायत की और आरोप लगाया कि एक महिला सांसद को रात में उसके आवास से हटाने की कोशिश ने उनकी सुरक्षा और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े सवाल खड़े किए हैं।

मोइत्रा ने तीन वरिष्ठ नदिया अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस भी दिया था।

प्रशासन ने क्या कहा?

मोइत्रा ने जिस कार्रवाई को देर रात की बेदखली बताया है, उसके पीछे प्रशासन की ओर से सर्किट हाउस में रखरखाव और सफाई कार्य का हवाला दिए जाने की रिपोर्ट है। मोइत्रा के अनुसार, उन्हें जो आदेश भेजा गया था उसमें 12 अगस्त का आदेश शामिल था।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। मोइत्रा ने कार्रवाई को मनमाना और अधिकारों का उल्लंघन बताया है, जबकि प्रशासनिक आदेश में सर्किट हाउस के रखरखाव से संबंधित वजह बताई गई थी।

'जय श्री राम' के नारे लगाने वाली भीड़ का आरोप

मामले ने राजनीतिक रंग इसलिए भी पकड़ा क्योंकि मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि उनके कमरे को खाली कराने के दौरान सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और 'जय श्री राम' के नारे लगाए जा रहे थे।

यह आरोप भी मोइत्रा की ओर से सामने आया है और इस पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।

मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

यह विवाद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक निर्वाचित सांसद और जिला प्रशासन के बीच टकराव का सवाल सामने आया है। इसके अलावा, मोइत्रा के वकील ने इसे संघवाद, संवैधानिक अधिकार और प्रशासनिक कार्रवाई से जोड़ते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के सामने यह सवाल भी आया कि क्या ऐसे मामले में सीधे शीर्ष अदालत का रुख किया जाना चाहिए या पहले संबंधित हाई कोर्ट में जाना उचित होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया?

फिलहाल अदालत ने मोइत्रा की याचिका पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। तत्काल सुनवाई की मांग पर भी अदालत ने तुरंत राहत नहीं दी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पीठ ने संकेत दिया कि इस मामले को हाई कोर्ट में भी उठाया जा सकता है।

इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत या याचिका खारिज होने के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। अभी मामला न्यायिक स्तर पर आगे बढ़ने की स्थिति में है।

एक नजर में पूरा मामला

मुद्दाजानकारीनेतामहुआ मोइत्रापार्टीतृणमूल कांग्रेसलोकसभा सीटकृष्णानगर, पश्चिम बंगालविवादित जगहकृष्णानगर/नदिया सर्किट हाउसघटना14 अगस्त 2026 की रातमोइत्रा का आरोपदेर रात कमरा खाली कराने और बेदखल करने की कार्रवाईप्रशासन की बताई वजहरखरखाव और सफाई से जुड़ा आदेशसुप्रीम कोर्ट में याचिकाArticle 32 के तहतमांगतत्काल सुनवाई और स्वतंत्र जांचSC की प्रतिक्रियातत्काल सुनवाई से परहेज; हाई कोर्ट जाने का संकेत

निष्कर्ष: महुआ मोइत्रा ने नदिया सर्किट हाउस से कथित देर रात बेदखली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनके वकील ने इसे संवैधानिक अधिकारों और संघवाद से जुड़ा मामला बताते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतिम राहत नहीं दी है और मामले को हाई कोर्ट में ले जाने की संभावना की ओर संकेत किया है।

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